समस्तीपुर जंक्शन, जिसे भारतीय रेलवे की जीवन रेखा कहा जाता है, वहां की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं . प्लेटफार्म संख्या – 1 पास रेल पुल के नीचे अज्ञात शवों को पहचान के लिए रखा जाता है, लेकिन मर्चरी फ्रीजर की सुविधा नहीं होने के कारण यह स्थान बदबू , संक्रमण और लापरवाही का प्रतीक बन गया है .
शवों को रखने की अमानवीय व्यवस्था
रेल पुल के नीचे शवों को रखा जाता है, जिससे आसपास का माहौल असहनीय हो जाता है . गर्मी के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है . शवों से उठने वाली दुर्गंध इतनी तेज़ होती है कि करीब 200 मीटर के दायरे में खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है .
नियमों की अनदेखी
नियमों के अनुसार रेल हादसों, ट्रेन से कटने या अन्य कारणों से मिलने वाले अज्ञात शवों को उनकी शिनाख्त के लिए कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन समस्तीपुर जंक्शन पर इसके लिए उचित व्यवस्था नहीं है .
हर महीने आते हैं 4 से 5 अज्ञात शव
औसतन हर महीने 4 से 5 अज्ञात शव यहां लाए जाते हैं, लेकिन इन शवों को रखने के लिए न तो मरचुरी फ्रीजर की व्यवस्था है और न ही नियमित रूप से केमिकल छिड़काव या सैनिटाईजेशन की कोई प्रणाली है .
क्या है समाधान ?
समस्तीपुर जंक्शन पर मर्चरी फ्रीजर की व्यवस्था की जानी चाहिए , ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके . इसके अलावा नियमित रूप से केमिकल छिड़काव और सैनिटाईजेशन की व्यवस्था भी की जानी चाहिए .