समस्तीपुर के सरायरंजन प्रखंड मे जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र और CRY ने मिलकर मुसहर टोली भोजपुर में नया शिक्षा केन्द्र शुरू किया। जानिए कैसे 8 वर्षों से 9 गावों मे चल रहे ये केन्द्र ड्राॅपआउट बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं।
24 अप्रैल 2026 को बिहार के समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड स्थित अख्तियारपुर बलभद्र पंचायत के वार्ड-12, भोजपुर मुसहर टोली में एक नई उम्मीद का दीप जला। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर और CRY- Child Rights and You के संयुक्त प्रयास से यहां एक नए सामुदायिक शिक्षा केन्द्र का उद्घाटन किया गया।यह पहल इसलिए खास है क्योंकि मुसहर समुदाय बिहार के सबसे वंचित और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदायों में से एक है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में मुसहर समुदाय की साक्षरता दर मात्र 9.8% है।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अंश
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी, वार्ड सदस्य बेचनी देवी, सामुदायिक लीडर रामउमेद राम और अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद:
मुख्य अतिथि: प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी
आयोजक संस्था: जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी, सचिव सुरेन्द्र कुमार, अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया-
CRY प्रतिनिधि: सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट दिनेश प्रसाद चौरसिया
स्थानीय सहयोग: सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार राय, विद्यानंद राय, सामुदायिक शिक्षिका संगीता कुमारी
8 वर्षों का सफर: 9 गांवों में बदलाव की कहानी
सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट दिनेश प्रसाद चौरसिया ने बताया कि यह कोई पहला केन्द्र नहीं है। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र पिछले 8 वर्षों से सरायरंजन प्रखंड के 9 मुसहर बाहुल्य गांवों में नि:शुल्क सामुदायिक शिक्षा केन्द्र चला रहा है।
इन केन्द्रों का मुख्य उद्देश्य:
ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान: जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं उन्हें वापस शिक्षा से जोड़ना
नामांकन में मदद: अनामांकित बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना
ब्रिज कोर्स: कमजोर बच्चों को मुख्यधारा की पढ़ाई के लिए तैयार करना
पोषण सहयोग: डाबर इंडिया लिमिटेड के सहयोग से पोषण सामग्री वितरण
प्रखंड प्रमुख का संदेश: “जाति से नहीं, कर्तव्य से बड़ा होता है इंसान”
प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को नियमित स्कूल भेजें। उन्होंने दशरथ मांझी ‘माउंटेन मैन’ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है।
भीषण गर्मी में राहत: बच्चों को बांटा गया जूस और ग्लूकोज
अप्रैल की तेज गर्मी को देखते हुए संस्था के सचिव सुरेन्द्र कुमार और अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया ने सभी बच्चों को डाबर कंपनी का जूस और ग्लूकोज दिया। प्रखंड प्रमुख ने अपने हाथों से पोषण किट का वितरण भी किया।

सामुदायिक शिक्षा केन्द्र क्यों जरूरी हैं?
बिहार शिक्षा परियोजना के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अभी भी 6-14 आयु वर्ग के 1.4% बच्चे स्कूल से बाहर हैं। मुसहर, डोम, नट जैसी महादलित जातियों में यह आंकड़ा 8-10% तक पहुंच जाता है। ऐसे में सामुदायिक शिक्षा केन्द्र ब्रिज का काम करते हैं।
आगे की राह
सामुदायिक शिक्षक संदीप कुमार सादा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संस्था का लक्ष्य है कि अगले 2 साल में सरायरंजन के सभी 15 मुसहर टोलों तक पहुंच बनाई जाए।
निष्कर्ष
शिक्षा ही एकमात्र माध्यम है जो पीढ़ियों से चले आ रहे गरीबी और भेदभाव के चक्र को तोड़ सकता है। भोजपुर मुसहर टोली में खुला यह केन्द्र दर्जनों बच्चों के लिए स्कूल का पहला कदम बनेगा।