अंतरिम मुआवजा के प्रक्रिया बताते हुए जिला विधिक प्राधिकार के लेखपाल श्री प्रभात रंजन।

अंतरिम मुआवजा और सपोर्ट पर्सन की भूमिका” विषय पर जिला स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित

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July 24, 2026

समस्तीपुर, 24 जुलाई 2026: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर के सभागार में शुक्रवार को जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के तत्वावधान में “अंतरिम मुआवजा और सपोर्ट पर्सन की भूमिका” विषय पर समन्वय बैठक हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित बच्चों को त्वरित राहत दिलाना और सपोर्ट पर्सन की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना था।

बैठक का मुख्य उद्देश्य

बैठक का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित बच्चों को त्वरित राहत के रूप में अंतरिम मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया को तेज करना और सपोर्ट पर्सन की जिम्मेदारियों के बारे में सभी संबंधित विभागों को जागरूक करना था।

विशेषज्ञों ने क्या बताया

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के लेखापाल श्री प्रभात रंजन ने बताया कि अंतरिम मुआवजा पीड़ित का कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा: “पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित बच्चे को 30 दिनों के अंदर अंतरिम मुआवजा मिलना उसका कानूनी अधिकार है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार इस प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी पात्र बच्चा मुआवजे से वंचित न रहे, यह हमारी प्राथमिकता है।”

अंतरिम मुआवजा के प्रक्रिया बताते हुए जिला विधिक प्राधिकार के लेखपाल श्री प्रभात रंजन।
अंतरिम मुआवजा के प्रक्रिया बताते हुए जिला विधिक प्राधिकार के लेखपाल श्री प्रभात रंजन।

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जिला समन्वयक श्री शंकर मल्लिक ने सपोर्ट पर्सन की भूमिका समझाई: “सपोर्ट पर्सन पीड़ित बच्चे और उसके परिवार के लिए एक पुल का काम करता है। उसकी भूमिका बच्चे को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देना, उसे भावनात्मक संबल देना और सभी सरकारी योजनाओं से जोड़ना है।”

जमीनी स्थिति

जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव श्री सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में संस्था ने जिले में 72 पॉक्सो पीड़ित परिवारों को चिन्हित किया है। इनमें से 50 केसों में संस्था के अधिवक्ताओं द्वारा निःशुल्क कानूनी सहायता दी जा रही है।अब तक 12 पीड़ित बच्चों के लिए अंतरिम मुआवजे के आवेदन जिला विधिक सेवा प्राधिकार में जमा किए जा चुके हैं और प्रक्रिया प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि “हमारा प्रयास है कि कोई भी पीड़ित बच्चा मुआवजे और सहयोग से वंचित न रहे। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।”

कौन-कौन उपस्थित रहे

बैठक में श्री रवि कुमार मिश्रा, परियोजना समन्वयक, श्री राजीव कुमार पटेल, अधिवक्ता, सुश्री दीप्ति कुमारी, जिला समन्वयक, श्री विद्यानंद, DLSA, श्री शोभानंद सिंह, सुश्री चंचला कुमारी, सुश्री पूजा कुमारी, श्री मयंक कुमार सिन्हा, सुश्री नेहा कुमारी के साथ नए पैरालीगल वॉलंटियर और पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता शामिल हुए।

संदर्भ: पॉक्सो और अंतरिम मुआवजा क्यों जरूरी है

पॉक्सो अधिनियम 2012 के तहत यौन अपराधों के पीड़ित बच्चों को पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की “Victim Compensation Scheme for Women Victims/Survivors of Sexual Assault/other Crimes – 2018” के तहत अंतरिम मुआवजा 30 दिन में देने का निर्देश है। इसका उद्देश्य मुकदमे के दौरान बच्चे और परिवार को आर्थिक सहारा देना है।

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मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है मुझे न्यूज़ - ऑटोमोबाइल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, मनोरंजन, एजुकेशन और खेल सहित विभिन्न श्रेणियों में लिखना पसंद है

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