समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित दो दिवसीय किसान मेला के दूसरे दिन किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मेले में राज्य के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और खेती से जुड़ी नई संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मेले के दूसरे दिन कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और किसानों के लिए तैयार की गई नई योजनाओं तथा प्रदर्शनों की सराहना की।

कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने मशरूम उत्पादन, श्री अन्न (मिलेट्स) और बीज निदेशालय के स्टॉलों का विशेष रूप से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों से इन परियोजनाओं के बारे में जानकारी ली और किसानों को इससे होने वाले लाभों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों तक नई तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों को पहुंचाना भी है।उन्होंने बताया कि छोटे किसानों और सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले लोगों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विशेष पहल की जा रही है। इसके तहत फूल, मसाले और विभिन्न सब्जियों के बीज के छोटे-छोटे पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन बीज पैकेटों की मदद से लोग अपने घरों के आसपास या छोटे स्थानों में भी किचेन गार्डन तैयार कर सकते हैं। इससे उन्हें साल भर ताजी और पौष्टिक हरी सब्जियां तथा मसाले मिल सकेंगे। साथ ही घर के आसपास फूलों की खेती से वातावरण भी सुंदर और हराभरा बना रहेगा।कुलपति ने कहा कि किचेन गार्डन की यह पहल खास तौर पर उन परिवारों के लिए लाभकारी है जिनके पास खेती के लिए बड़ी जमीन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने किसानों और आम लोगों से आग्रह किया कि वे अपने घरों में छोटी-छोटी जगहों का उपयोग कर सब्जियों और फूलों की खेती शुरू करें।

मेले के दौरान कुलपति ने कृषि विज्ञान केंद्र के स्टॉल का भी निरीक्षण किया। यहां प्रदर्शित बत्तीसा केले के पौधे पर लगे करीब नौ फीट लंबे घौंद (केले का गुच्छा) ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कुलपति ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि ऐसी उन्नत तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए ताकि वे भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर कुलपति ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों को किसानों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझना और उन्हें समय पर समाधान उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान मेला में आए किसानों से फीडबैक लिया जाए ताकि भविष्य में इस आयोजन को और अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाया जा सके।

प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रत्नेश झा ने बताया कि किसान मेला के दौरान विभिन्न विषयों पर किसानों की गोष्ठियों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इन गोष्ठियों में आधुनिक खेती, जैविक कृषि, मशरूम उत्पादन, फल और सब्जी की उन्नत खेती, पशुपालन और कृषि आधारित उद्यमिता जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि इन गोष्ठियों में बड़ी संख्या में महिला किसान भी भाग ले रही हैं। महिला किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें उन्हें खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी जा रही है। गोष्ठियों के दौरान उनसे संबंधित विषयों पर प्रश्न भी पूछे जाते हैं ताकि उनका फीडबैक प्राप्त किया जा सके और उनकी जानकारी का आकलन हो सके। डॉ. झा ने बताया कि महिला किसानों को उत्साहित करने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे खेती के क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। वहीं विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि किसान मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि मेले में आए किसानों की समस्याओं को गोष्ठियों के माध्यम से ध्यानपूर्वक सुना और नोट किया जा रहा है। यदि किसी समस्या का तत्काल समाधान उपलब्ध नहीं है तो उस पर विश्वविद्यालय में अनुसंधान शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निरंतर बदलती चुनौतियों का समाधान केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के अनुभवों के समन्वय से ही संभव है। इसलिए विश्वविद्यालय किसानों के साथ मिलकर नई तकनीकों और उन्नत किस्मों के विकास पर काम कर रहा है। किसान मेला में देश भर के विभिन्न कृषि संस्थानों के वैज्ञानिक भी भाग ले रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आने वाले कई संस्थानों के वैज्ञानिक अपने-अपने संस्थानों द्वारा विकसित नई तकनीकों और उन्नत फसल किस्मों का प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान इन तकनीकों के बारे में जानकारी लेने के साथ-साथ कई उन्नत बीज और पौधे सीधे खरीद भी रहे हैं।इसके अलावा किसान मेला में विभिन्न बैंकों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से किसानों को बैंकिंग सेवाओं और कृषि से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। बैंक अधिकारियों द्वारा किसानों को कृषि ऋण, फसल बीमा और अन्य वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। किसान मेला में दूसरे दिन भी भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। आयोजकों के अनुसार मेले में दस हजार से अधिक लोग पहुंचे। किसानों ने यहां उपलब्ध जानकारी और तकनीकों में गहरी रुचि दिखाई और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी प्राप्त की।कुल मिलाकर यह किसान मेला किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और नए अवसरों का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि इस प्रकार के आयोजनों से किसानों को आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने और अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।