समस्तीपुर में बाल संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला

समस्तीपुर में बाल संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला: पोक्सो और किशोर न्याय अधिनियम पर पुलिस व प्रशासन को मिला विशेष प्रशिक्षण

User avatar placeholder
Written by New Khabarein

March 18, 2026

समस्तीपुर में बाल संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला: समस्तीपुर जिले में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, समस्तीपुर, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में जननायक कर्पूरी ठाकुर सभागार में “बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) और किशोर न्याय अधिनियम” विषयक एक दिवसीय उन्मुखीकरण सह क्षमतावर्धन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों और संबंधित हितधारकों को बाल संरक्षण कानूनों की गहराई से जानकारी देना और उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना था। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें आरक्षी उपाधीक्षक (यातायात) आशीष राज, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू कुमारी, जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार, कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने बाल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

समस्तीपुर में बाल संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला
समस्तीपुर में बाल संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला: पोक्सो और किशोर न्याय अधिनियम पर पुलिस व प्रशासन को मिला विशेष प्रशिक्षण

अपने उद्घाटन संबोधन में आरक्षी उपाधीक्षक ( यातायात ) आशीष राज ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून के माध्यम से ही नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता और संवेदनशीलता से भी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को अपराध और शोषण से बचाने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की भूमिका इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस पदाधिकारियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि बाल संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें पुलिस, प्रशासन और समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि सभी संस्थाएं मिलकर कार्य करें, तो बाल शोषण, बाल विवाह और बाल श्रम जैसी समस्याओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक भगवान पाठक ने पोक्सो अधिनियम ( POCSO ACT ) और किशोर न्याय अधिनियम की बारीकियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इन कानूनों के तहत पुलिस को किस प्रकार संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए और पीड़ित बच्चों के साथ व्यवहार करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया।

पोक्सो अधिनियम प्रशिक्षण
पोक्सो अधिनियम प्रशिक्षण

संस्था द्वारा समस्तीपुर जिले में किए गए कार्यों की जानकारी

जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र द्वारा समस्तीपुर जिले में किए गए कार्यों की जानकारी भी इस अवसर पर साझा की गई। संस्था ने अब तक 150 पोक्सो पीड़िताओं को मनोसामाजिक और कानूनी सहायता प्रदान की है। इसके अलावा लगभग 700 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उन्हें मुख्यधारा में शामिल कराया गया है और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया है।

बाल विवाह के खिलाफ भी संस्था ने उल्लेखनीय कार्य किया है। करीब 3000 किशोरियों को बाल विवाह के प्रति जागरूक किया गया है, जबकि 600 नाबालिग किशोरियों को बाल विवाह से बचाया गया है, जिनकी शादी तय हो चुकी थी। यह उपलब्धियां दर्शाती हैं कि सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

इस कार्य में विभिन्न विभागों और संगठनों का सहयोग भी सराहनीय रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक शंकर मलिक, पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, श्रम संसाधन विभाग, रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेल पुलिस ने मिलकर इन अभियानों को सफल बनाया। इसके अतिरिक्त “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस, CRY (चाइल्ड राइट्स एंड यू) और एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि मीडिया संस्थानों ने भी बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों को उठाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है। जनजागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।

एक सौ से अधिक थानाध्यक्ष और बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी शामिल रहें

इस कार्यशाला में जिले के सभी थानों से एक सौ से अधिक थानाध्यक्ष और बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी शामिल हुए। उन्हें बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर तरीके से काम कर सकें।

यह कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट किया कि बाल संरक्षण के लिए एक समन्वित और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है। जब प्रशासन, पुलिस और समाज मिलकर काम करते हैं, तब ही बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

Image placeholder

मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है मुझे न्यूज़ - ऑटोमोबाइल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, मनोरंजन, एजुकेशन और खेल सहित विभिन्न श्रेणियों में लिखना पसंद है

Leave a Comment