बेतिया, योगापट्टी | पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड अंतर्गत बगही पुरैना पंचायत में मंगलवार को किशोर-किशोरी सशक्तिकरण परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण उन्मुखीकरण बैठक का आयोजन किया गया। प्रथम संस्था के प्रखंड समन्वयक शुभम कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ परियोजना के उद्देश्यों, चुनौतियों और पंचायत की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच, विकास मित्र समेत प्रथम संस्था के सोनू कुमार भी उपस्थित रहे।
बैठक के मुख्य बिंदु: पंचायत की भूमिका हुई स्पष्ट
शुभम कुमार ने बताया कि किशोर-किशोरी सशक्तिकरण परियोजना का मुख्य लक्ष्य 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को शिक्षा, सुरक्षा और कौशल से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। इसमें पंचायत की भूमिका को सबसे अहम बताया गया। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर निम्न कार्यों को प्राथमिकता दी जाए:
- CWPC को सक्रिय करना: चाइल्ड वेलफेयर एंड प्रोटेक्शन कमेटी को हर पंचायत में सक्रिय रूप से काम करना होगा। यह कमेटी बच्चों से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी।
- बाल पंचायत का गठन: हर वार्ड में बाल पंचायत बनाकर किशोरों को नेतृत्व का अवसर देना है। हर महीने बाल पंचायत की बैठक अनिवार्य होगी।
- बाल विवाह की रोकथाम: पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।
- शिक्षा से जोड़ना: स्कूल छोड़ चुके किशोरों को दोबारा मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
- सुरक्षित मंच उपलब्ध कराना: किशोरियों के लिए पंचायत भवन में माह में एक बार ‘सुरक्षित संवाद मंच’ का आयोजन हो, जहां वे अपनी बात रख सकें।
सरकारी योजनाओं और कौशल प्रशिक्षण पर फोकस
बैठक में बताया गया कि किशोरों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना पंचायत की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, किशोरी स्वास्थ्य योजना, सुकन्या समृद्धि योजना जैसी योजनाओं से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। इसके अलावा 15 वर्ष से ऊपर के किशोर-किशोरियों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। सिलाई, कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण जैसे कोर्स कराकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाया जाएगा। प्रखंड स्तर पर जल्द ही कौशल प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की योजना है।
आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच का प्रशिक्षण
शुभम कुमार ने जनप्रतिनिधियों को ‘आत्मसम्मान और आत्म मूल्यांकन’ प्रशिक्षण के मॉड्यूल भी समझाए। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में बच्चे मानसिक और शारीरिक बदलाव से गुजरते हैं। इस दौरान मीडिया, समाज और साथियों का दबाव उन पर गहरा असर डालता है।

प्रशिक्षण के मुख्य अंश:
- मीडिया के दिखावे का असर: सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली ‘परफेक्ट बॉडी’ की छवि से बच्चों में हीन भावना आती है। उन्हें समझाना है कि हर शरीर अलग और खास होता है।
- शरीर पर गर्व करना: किशोरों को अपने शरीर पर की जाने वाली टिप्पणियों को नजरअंदाज कर आत्मविश्वास रखना सिखाया जाए।
- खुद के गुणों को पहचानना: हर बच्चे में कोई न कोई खास स्किल होती है। पेंटिंग, गाना, खेल या पढ़ाई – अपने टैलेंट को पहचानकर उसे निखारना जरूरी है।
- बुरे व्यवहार का असर: छेड़छाड़, भेदभाव या घरेलू हिंसा का किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे मामलों में चुप न रहकर हेल्पलाइन पर मदद लें।
बच्चों के अधिकार और हेल्पलाइन की जानकारी दी गई
बैठक में बच्चों के चार मूल अधिकारों – जीवन का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार और सहभागिता का अधिकार – पर विस्तार से चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों को बताया गया कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 14 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा हर बच्चे का हक है।
आपात स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर भी साझा किए गए:
- चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
- महिला हेल्पलाइन: 181
- पुलिस: 112
- घरेलू हिंसा हेल्पलाइन: 1291
पंचायत प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि इन नंबरों को पंचायत भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों की दीवारों पर लिखवाएं।
सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी
शुभम कुमार ने कहा कि नशा, घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव जैसी बुराइयों को खत्म करने में पंचायत की अहम भूमिका है। किशोरों को नशे से दूर रखने के लिए खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए। घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ित को कानूनी मदद दिलाने में पंचायत मदद करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘बेटी और बेटे में भेदभाव खत्म करना’ इस परियोजना का मुख्य संदेश है। बेटियों को भी शिक्षा और खेल में बराबर के अवसर मिलने चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने जताई प्रतिबद्धता
बैठक में मौजूद बगही पुरैना के मुखिया ने कहा, “हमारी पंचायत में एक भी बाल विवाह नहीं होने देंगे। हर वार्ड में बाल पंचायत का गठन 15 दिन के अंदर कर दिया जाएगा।” वार्ड सदस्यों ने भी स्कूल न जाने वाले बच्चों की सूची बनाकर उन्हें स्कूल भेजने का संकल्प लिया। विकास मित्र ने कहा कि वे घर-घर जाकर सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे।
प्रथम संस्था के सोनू कुमार ने बताया कि अगले महीने से पंचायत के हर वार्ड में किशोर-किशोरियों के लिए ‘जीवन कौशल सत्र’ शुरू किए जाएंगे। इसमें स्वास्थ्य, स्वच्छता और करियर गाइडेंस की जानकारी दी जाएगी।