बाल श्रम निषेद दिवस 2026 पर जागरूकता रथ

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2026 पर समस्तीपुर रेलवे स्टेशन परिसर में चला विशेष जागरूकता अभियान, अधिकारियों ने कहा “बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, विद्यालय है”

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Written by New Khabarein

June 13, 2026

समस्तीपुर, बिहार | 13 जून 2026 

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन परिसर में एक अभूतपूर्व जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ, सरकारी रेलवे पुलिस जीआरपी और कई सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से चलाए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यात्रियों, दुकानदारों, कुलियों और आम नागरिकों को बाल श्रम के दुष्परिणामों, कानूनी सजा और बच्चों के मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

इस अभियान की सबसे आकर्षक विशेषता थी “जागरूकता रथ”। यह जागरूकता रथ जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस के सहयोग से बाल श्रम रोकथाम को लेकर जागरूकता रथ चलाया गया।यह कार्यक्रम स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार से शुरू हुआ यह कर्यक्रम प्लेटफॉर्म नंबर 1 से लेकर प्लेटफॉर्म नंबर 6 तक किया गया। रथ पर लगे लाउडस्पीकर से बाल श्रम विरोधी गीत, नारे और जानकारी लगातार प्रसारित की गई। “बचपन काम का नहीं, पढ़ाई का है”, “14 साल से कम उम्र – काम कराना अपराध”, “चाइल्डलाइन 1098 पर कॉल करें” जैसे संदेशों ने हर व्यक्ति का ध्यान आकर्षित किया।

अधिकारियों और समाजसेवियों की रही उपस्थिति 

कार्यक्रम में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। स्टेशन अधीक्षक श्री नीलेश कुमार ने पूरे अभियान की देखरेख की। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन पर बाल श्रम की कोई जगह नहीं है और इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए आरपीएफ को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

आरपीएफ निरीक्षक प्रभारी श्री अविनाश करोसिया ने कार्यक्रम की शुरुआत की और जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि समस्तीपुर जंक्शन बिहार का एक व्यस्त रेलवे स्टेशन है और यहाँ से रोजाना हजारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में यहाँ बाल श्रम और चाइल्ड ट्रैफिकिंग की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आरपीएफ ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाई है और हर सप्ताह औचक जांच की जाएगी।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2026 पर जागरूकता रैली की हरी झंडी दिखाते आरपीएफ निरीक्षक प्रभारी श्री अविनाश करोसिया

उपनिरीक्षक श्री पीके चौधरी और सीएस श्री ब्रजेश कुमार ने यात्रियों को ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि ट्रेन के डिब्बों में चाय, पानी या सामान बेचने वाले बच्चे मिल जाते हैं। ये बच्चे या तो घर से भागे हुए होते हैं या फिर ट्रैफिकर द्वारा लाए गए होते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत आरपीएफ हेल्पलाइन 182 या चाइल्डलाइन 1098 पर सूचना देना हर नागरिक का कर्तव्य है। आपकी एक कॉल एक बच्चे का भविष्य बचा सकती है।

सामाजिक संस्थाओं की ओर से जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र से सामाजिक कार्यकर्ता श्री पप्पू यादव, श्री रवि कुमार मिश्रा, सुश्री पूजा कुमारी और श्री शोभानन्द सिंह ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इन्होंने स्टेशन पर खड़े होकर लोगों को पर्चे बांटे और बच्चों की शिक्षा के महत्व को समझाया। एवीए के परियोजना अधिकारी श्री शिवपुजन कुमार ने बताया कि उनकी संस्था “जस्टिस एक्सेस कार्यक्रम” के तहत बिहार के कई जिलों में बाल श्रम के खिलाफ काम कर रही है और समस्तीपुर में यह विशेष अभियान चलाया गया है।

आरपीएफ और जीआरपी के कई अन्य अधिकारी और जवान भी पूरे समय अभियान में शामिल रहे और लोगों को कानूनी जानकारी देते रहे।

जागरूकता रथ ने हर प्लेटफॉर्म पर दी दस्तक 

जागरूकता रथ स्टेशन के हर कोने तक पहुंचा। चाय की दुकान, खाने की स्टॉल, पार्किंग क्षेत्र, ऑटो स्टैंड और पार्सल घर – हर जगह रथ रुका और लोगों को समझाया गया। रथ पर लगे पोस्टर और बैनर पर बाल श्रम से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया था।

स्वयंसेवकों ने हाथ में प्लेकार्ड लिए हुए नारे लगाए: “बच्चे को काम नहीं, स्कूल भेजो”, “बाल श्रम हटाओ, देश बचाओ”, “बचपन सुरक्षित तो भारत सुरक्षित”। यात्री जो ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, वे भी रुक कर यह संदेश सुन रहे थे। कई यात्रियों ने अपने मोबाइल से फोटो और वीडियो भी लिए और सोशल मीडिया पर शेयर करने का वादा किया।

बच्चों के अधिकार और कानून की दी गई जानकारी 

अभियान के दौरान अधिकारियों ने माइक पर खड़े होकर विस्तार से बताया कि भारत का संविधान और कानून बच्चों को विशेष सुरक्षा देता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने, खान या खतरनाक काम में नहीं लगाया जा सकता।

बाल श्रम निषेध एवं नियमन अधिनियम 1986 और इसमें 2016 में किए गए संशोधन के अनुसार:

  1. 14 साल से कम उम्र के बच्चे से कोई भी काम लेना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
  2. 14 से 18 साल के किशोरों से भी खतरनाक उद्योगों जैसे पटाखा बनाना, केमिकल फैक्ट्री, गैराज, वेल्डिंग, भट्ठा में काम नहीं कराया जा सकता।
  3. इस कानून को तोड़ने पर दुकानदार या नियोक्ता को 6 महीने से 2 साल तक की जेल और 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि “गरीबी” बाल श्रम का बहाना नहीं हो सकती। सरकार के पास गरीब परिवारों के लिए कई योजनाएं हैं जैसे पीएम गरीब कल्याण योजना, मुख्यमंत्री बाल सहायता योजना, मिड डे मील, मुफ्त शिक्षा अधिकार अधिनियम। इन योजनाओं का लाभ लेकर परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं।

“बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, विद्यालय है” 

कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा जोर इसी बात पर दिया गया कि बच्चे का स्थान दुकान या गैराज नहीं, बल्कि स्कूल है। स्टेशन अधीक्षक नीलेश कुमार ने कहा, “एक बच्चा जो आज ट्रेन में चाय बेच रहा है, वही कल इंजीनियर, डॉक्टर या अधिकारी बन सकता है। बस उसे मौका चाहिए। बाल श्रम उस मौके को छीन लेता है। हम सबको मिलकर यह मौका उसे देना होगा।”

आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश करोसिया ने कहा, “हम सभी अभिभावकों से अपील करते हैं कि अपने बच्चों को स्कूल भेजें। अगर आर्थिक दिक्कत है तो सरकारी योजनाएं से जोड़ने में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के कार्यकर्ता आपकी मदद करेंगी। पर बच्चे से मेहनत कराना बंद कीजिए। आज की छोटी कमाई कल के बड़े नुकसान में बदल जाएगी।” इसके साथ ही हस्ताक्षर कर जागरूकता रैली को स्टेशन के आस – पास के क्षेत्रों में जागरूकता के लिए रवाना किया गया।

आरपीएफ निरीक्षक प्रभारी श्री अविनाश करोसिया जी ने हस्ताक्षर कर बाल श्रम मुक्त  जागरूकता रैली को रवाना किया
आरपीएफ निरीक्षक प्रभारी श्री अविनाश करोसिया जी ने हस्ताक्षर कर जागरूकता रैली को रवाना किया गया।

सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू यादव ने लोगों को समझाया कि बाल श्रम सिर्फ बच्चे का शोषण नहीं है, यह पूरे समाज के लिए खतरा है। “जो बच्चा आज कम उम्र में काम करेगा, वह कल अशिक्षित रहेगा। अशिक्षित युवा गलत संगति में पड़कर अपराध की ओर बढ़ सकता है। इसलिए बाल श्रम रोकना देश हित में है और हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

गलत संगति और असामाजिक गतिविधियों से बचाव पर जोर 

अभियान में यह बिंदु भी उठाया गया कि बाल श्रमिक बच्चे आसानी से गलत संगति के शिकार हो जाते हैं। स्टेशन और ट्रेन का माहौल उनके लिए सुरक्षित नहीं होता। वहां नशीली चीजों की तस्करी, चोरी और अन्य असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता है।

जीआरपी के अधिकारियों ने बताया कि कई बार देखा गया है कि ट्रैफिकर बच्चों को स्टेशन पर लाकर उनसे भीख मंगवाते हैं या फिर उनसे चोरी करवाते हैं। एक बार बच्चा इस चक्र में फंस जाए तो उसका भविष्य अंधकार में चला जाता है। इसलिए अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों पर नजर रखें और उन्हें अच्छी संगत दें।

जवाहर ज्योति की पूजा कुमारी ने लड़कियों के विशेष खतरे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बाल श्रम में लगी लड़कियां ट्रैफिकिंग और शोषण की सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान का मकसद भी यही है कि हर बेटी स्कूल जाए और सुरक्षित रहे। उन्होंने माताओं से अपील की कि वे घरेलू काम में लगी लड़कियों को जरूर स्कूल भेजें।

यात्रियों ने लिया संकल्प 

अभियान का सबसे संतोषजनक पहलू यह रहा कि यात्रियों ने इस संदेश को सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि उसे अपनाने का संकल्प भी लिया। कई यात्रियों ने हाथ उठाकर वादा किया कि वे अपने घर, मोहल्ले और दुकान पर बाल श्रम नहीं होने देंगे।

एक व्यापारी ने कहा, “आज तक हमने सोचा ही नहीं था कि 12 साल के लड़के से दुकान पर काम कराना कानूनी जुर्म है। आज समझ आया। कल से उस बच्चे को स्कूल भेजूंगा और उसकी फीस में मदद करूंगा।”

कई महिला यात्रियों ने कहा कि वे अपने घर में काम करने वाली मेड से विशेष रूप से पूछेंगी कि क्या उसके बच्चे स्कूल जाते हैं या नहीं। अगर नहीं जाते तो उन्हें स्कूल ले जाने में मदद करेंगी।

स्टेशन पर मौजूद ऑटो चालकों के संघ ने भी यह संकल्प लिया कि वे अपने ऑटो में किसी बच्चे को बगैर टिकट सफर नहीं कराएंगे और अगर कोई बच्चा अकेले सफर करता दिखे तो तुरंत आरपीएफ को सूचित करेंगे।

समस्तीपुर के संदर्भ में बाल श्रम की स्थिति 

समस्तीपुर जिला कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहाँ गरीबी और पलायन के कारण बाल श्रम की समस्या बनी रहती है। कई परिवार रोजी-रोटी की तलाश में शहर जाते हैं और अपने बच्चों को भी काम पर लगा देते हैं। ईंट-भट्ठा, ढाबा, गैराज और घर में काम करने वाले बच्चों की संख्या यहाँ कम नहीं है।

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के आंकड़ों के अनुसार केंद्र ने पिछले कुछ सालों में समस्तीपुर जिले से 300 से अधिक बाल श्रमिक बच्चों को मुक्त कराकर स्कूल में दाखिला दिलाया है। केंद्र इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा, पोशाक और दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराता है। केंद्र का उद्देश्य सिर्फ बच्चे को छुड़ाना नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को आत्मनिर्भर बनाना है।

एवीए के शिवपुजन कुमार ने बताया कि आगामी दिनों में समस्तीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह के जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। पंचायत स्तर पर मीटिंग कर ग्राम प्रधानों और शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि गांव स्तर पर ही बाल श्रम को रोका जा सके।

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मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है मुझे न्यूज़ - ऑटोमोबाइल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, मनोरंजन, एजुकेशन और खेल सहित विभिन्न श्रेणियों में लिखना पसंद है

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