समस्तीपुर, ताजपुर – स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले ताजपुर में सियासी हलचल तेज हो गई है. भाकपा माले और खेग्रामस (अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा) ने 13 और 14 अगस्त को ताजपुर प्रखंड एवं अंचल कार्यालय पर 2 दिवसीय सामूहिक अनशन -सत्याग्रह करने का ऐलान कर दिया है. यह निर्णय गुरुवार को ताजपुर प्रखंड के रहीमाबाद गांव में आयोजित संयुक्त बैठक में लिया गया है. बैठक की अध्यक्षता भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया. बैठक में आसिफ होदा, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, मो० एजाज़, जीतेन्द्र सहनी, मो० क्यूम, मुकेश कुमार गुप्ता, नीलम देवी, धर्मेन्द्र पासवान, शाद तौहीदी, संजीव राय समेत दोनों संगठनों के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे.
नेताओं का कहना है कि गांवों में गरीबों पर लगातार हमले हो रहें हैं. इसी के खिलाफ ये आंदोलन पूरे बिहार में 15 अगस्त 2026 से पहले चलने वाले राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है. इसका मकसद गांव के सबसे कमज़ोर तबके के अधिकारों की रक्षा करना है.
आंदोलन के पीछे की 5 बड़ी मांगे
बैठक में वक्ताओं ने गांवों की जमीनी हकीकत को सामने रखा और सरकार से 5 ठोस मांगें की :
1.बुलडोजर कार्रवाई रोको, भूमिहीनों को जमीन-आवास दो
पिछले कुछ महीनों से कई गांवों में गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने कि कार्रवाई हो रही है. कई परिवार दशकों से एक ही जमीन पर रह हैं, लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं है. इस कारण उन्हें बेदखल करने का डर बना हुआ है . संगठनों की मांग है कि ऐसे परिवारों को पी. पी. एक्ट 1947 के तहत बासगीत पर्चा दिया जाए, ताकि उन्हें कानूनी मान्यता मिल सके. साथ ही हर भूमिहीन परिवार को आवास बनाने के लिए 5 डिसमिल जमीन दी जाए. नेताओं का कहना है कि जब तक जमीन नहीं होगी, तब तक आवास योजना, शौचालय और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा.
2. पहुंचपथ की व्यवस्था करो
ताजपुर के कई दलित और पिछड़े टोलों में आज भी पक्की सड़क नहीं है. बरसात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है. बैठक में कहा गया कि पहुंचपथ हर गांव का बुनियादी अधिकार है. सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन टोलों को मुख्य सड़क से जोड़ना चाहिए.