अक्षय तृतीय पर पश्चिम चम्पारण में बाल विवाह के खिलाफ महाअभियान

अक्षय तृतीय पर पश्चिम चम्पारण में बाल विवाह के खिलाफ महाअभियान, धर्मगुरुओं ने गीतों से दिया संदेश

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Written by New Khabarein

April 20, 2026

बेतिया (पश्चिम चम्पारण), 20 अप्रैल 2026:* अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पश्चिम चम्पारण जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जिला प्रशासन के आदेश पर एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। प्रयास जूवेनाइल एड सेंटर, बेतिया और प्रथम संस्था, बेतिया के संयुक्त तत्वावधान में जिले भर में किशोर-किशोरियों, अभिभावकों, ग्रामीण महिलाओं और धर्मगुरुओं को एक मंच पर लाकर यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल हर व्यक्ति दंड के भागी होंगे।

इस अभियान की खास बात रही कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों को जागरूकता का केंद्र बनाया गया। किशोर-किशोरियों ने स्वयं आगे बढ़कर अभियान की कमान संभाली और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर समाज को जगाने का काम किया।

अक्षय तृतीय पर पश्चिम चम्पारण में बाल विवाह के खिलाफ महाअभियान

जिला प्रशासन के आदेश के बाद एकजुट हुए संगठन

जिलाधिकारी , पश्चिम चम्पारण द्वारा अक्षय तृतीया को देखते हुए बाल विवाह रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने का आदेश निर्गत किया गया था। आदेश में स्पष्ट किया गया था कि यह दिन विवाह के लिए शुभ माना जाता है, इसलिए बाल विवाह की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। इसी के आलोक में प्रयास जूवेनाइल एड सेंटर और प्रथम संस्था ने संयुक्त कार्ययोजना बनाकर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समानांतर अभियान चलाया।प्रयास संस्था के निदेशक ने बताया, “प्रशासन का आदेश हमारे लिए दिशा-निर्देश था। हमने तय किया कि इस बार संदेश सीधे धर्मस्थलों से दिया जाए, क्योंकि समाज में धर्मगुरुओं की बात का गहरा असर होता है। किशोर-किशोरियों को हमने अभियान का चेहरा बनाया, ताकि वे खुद अपने हक के लिए आवाज उठाएं।”

कैसे चला अभियान: मंदिर-मंदिर पहुंची जागरूकता की टोली

अभियान की शुरुआत 19 अप्रैल की सुबह बेतिया के प्रमुख मंदिरों से की गई। प्रयास और प्रथम संस्था के कार्यकर्ता, स्कूली बच्चे, उनके अभिभावक और ग्रामीण महिलाएं टोलियों में बंटकर लौरिया, नरकटियागंज, बगहा, मैनाटांड़ और ठकराहां प्रखंड के मंदिरों में पहुंचे।

धर्मगुरुओं ने निभाई अग्रणी भूमिका

कई मंदिरों के पुजारी और स्थानीय मौलवी इस अभियान से स्वेच्छा से जुड़े। उन्होंने न सिर्फ बच्चों की बात सुनी, बल्कि मंच से संबोधन भी किया। बेतिया के एक प्राचीन शिव मंदिर के महंत ने कहा, “शास्त्रों में भी विवाह के लिए परिपक्वता को जरूरी माना गया है। कच्ची उम्र में विवाह करना बच्चे के भविष्य और स्वास्थ्य दोनों के साथ खिलवाड़ है।”

गीत-संगीत बना संदेश का माध्यम

जागरूकता को रोचक बनाने के लिए कई धर्मगुरुओं और स्थानीय कलाकारों ने गीतों का सहारा लिया। भोजपुरी और हिंदी में तैयार किए गए गीतों के जरिए यह समझाया गया कि बाल विवाह से लड़कियों की पढ़ाई छूटती है, स्वास्थ्य खराब होता है और कानूनी कार्रवाई भी होती है। एक पंडित जी द्वारा गाया गया गीत “बिटिया अभी नादान बा, ब्याह के लायक न बा” लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

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मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है मुझे न्यूज़ - ऑटोमोबाइल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, मनोरंजन, एजुकेशन और खेल सहित विभिन्न श्रेणियों में लिखना पसंद है

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