समस्तीपुर, 16 मार्च 2026: ग्राम पंचायत राज किसनपुर युसूफ पंचायत के वार्ड संख्या 9 में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति के गठन के लिए एक आम सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर (समस्तीपुर) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय के स्तर पर एक ऐसी समिति का गठन करना था जो बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की पहचान और उनके समाधान के लिए सामूहिक रूप से कार्य कर सके। आम सभा के दौरान उपस्थित लोगों की सर्वसम्मति से वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन किया गया और विभिन्न पदों पर सदस्यों का चयन किया गया।

सभा में स्थानीय वार्ड सदस्य संगीता शर्मा को समिति का अध्यक्ष चुना गया। वहीं पंच सदस्य मुनिया देवी को उपाध्यक्ष और आंगनबाड़ी सेविका मौसमी कुमारी को समिति का सचिव बनाया गया। इसके अलावा समिति में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से सदस्यों को शामिल किया गया।
समिति में विद्यालय शिक्षा समिति से अमिता कुमारी, आशा कार्यकर्ता ममता कुमारी, दिव्यांग बच्चे की माता अंजलि कुमारी, चौकीदार रानी देवी, शिक्षक अमरेंद्र कुमार ठाकुर, मीना मंच से पूजा कुमारी, बाल संसद से नीरज कुमार, जीविका समूह से मालती देवी, किशोरी समूह से नीशा कुमारी, एनजीओ प्रतिनिधि के रूप में किरण कुमारी तथा बुद्धिजीवी वर्ग से अनीता रानी साह को सदस्य के रूप में चुना गया। इस प्रकार समिति में समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की गई ताकि बच्चों से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से समझा और सुलझाया जा सके।
सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता बलराम चौरसिया ने वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति की भूमिका और महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसी समितियों में सामान्यतः 15 से 16 सदस्य होते हैं, जो पूरी तरह से सामाजिक सेवा की भावना से काम करते हैं। इस कार्य के लिए किसी प्रकार का आर्थिक लाभ या मानदेय नहीं दिया जाता है।उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी और अन्य प्रकार के शोषण जैसी समस्याओं की पहचान करना और समय रहते उनका समाधान निकालना है। इसके साथ ही समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सभी बच्चे शिक्षा से जुड़ें और उनका समुचित विकास हो।

बलराम चौरसिया ने यह भी कहा कि समुदाय की भागीदारी से ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा संभव है। यदि समाज के लोग जागरूक होकर आगे आएंगे तो बच्चों से जुड़ी कई समस्याओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटे बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केन्द्रों से जोड़ा जाए और बड़े बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाए।एनजीओ प्रतिनिधि किरण कुमारी ने अपने संबोधन में बाल विवाह को समाज की एक गंभीर कुरीति बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक असर डालता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद और लड़कों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही की जानी चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने बच्चों को पहले अच्छी शिक्षा दें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करें। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।वार्ड सदस्य और समिति की नव-निर्वाचित अध्यक्ष संगीता शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि एक मजबूत और सक्रिय समिति बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने सभी सदस्यों से मिलकर काम करने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
वहीं आंगनबाड़ी सेविका और समिति की सचिव मौसमी कुमारी ने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने माताओं से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय पर टीकाकरण और पोषण आहार दिलाने में सहयोग करें।सभा के दौरान उपस्थित अन्य लोगों ने भी अपने विचार साझा किए और बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। किरण कुमारी, विभा कुमारी, सहायिका रेखा कुमारी समेत कई ग्रामीणों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने वार्ड में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और समग्र विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। साथ ही बाल विवाह, बाल श्रम और बच्चों के शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया।इस प्रकार वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समिति का गठन बच्चों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस समिति के माध्यम से बच्चों से जुड़े मुद्दों पर समय रहते ध्यान दिया जा सकेगा और समाज में बच्चों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।