उजियारपुर में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र का सराहनीय पहल

उजियारपुर में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र का सराहनीय पहल: सैकड़ों परिवारों को मिला निशुल्क ग्लूकोज, शिक्षा और बाल अधिकारों पर दिया गया जोर

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Written by New Khabarein

April 7, 2026

समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड के परोरिया गांव में रविवार को एक सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने स्थानीय लोगों के बीच न केवल राहत पहुंचाई बल्कि शिक्षा और बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, अख्तियारपुर द्वारा डाबर इंडिया कंपनी के सहयोग से ग्लूकोज का निशुल्क वितरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और संस्था के प्रयासों की सराहना की।

गरीब परिवारों के पोषण के लिए पहल

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र को डाबर इंडिया कंपनी से प्राप्त ग्लूकोज के पैकेट और डब्बे परोरिया गांव के जरूरतमंद परिवारों में बांटे गए। प्रत्येक लाभुक को एक किलो ग्राम का ग्लूकोज पैकेट और एक डब्बा निशुल्क प्रदान किया गया। वितरण कार्यक्रम सुबह से शुरू होकर दोपहर तक चला, जिसमें सैकड़ों लोगों ने कतारबद्ध होकर सामग्री प्राप्त की।केंद्र के प्रतिनिधि बलराम चौरसिया ने इस अवसर पर कहा कि जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र एक समर्पित सामाजिक संस्था है, जो पिछले कई वर्षों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही है।

उजियारपुर में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र का सराहनीय पहल

उन्होंने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज में बराबरी स्थापित करना और हर बच्चे को खुशहाल बचपन देना है। “हमारा मानना है कि जब तक हर बच्चा शिक्षित और सुरक्षित नहीं होगा, तब तक एक समतामूलक समाज का सपना अधूरा रहेगा,” बलराम चौरसिया ने कहा।उन्होंने डाबर इंडिया कंपनी के सहयोग की चर्चा करते हुए बताया कि कंपनी का जवाहर ज्योति के साथ पुराना जुड़ाव है।

डाबर इंडिया सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर उन परिवारों के बच्चों के लिए पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराती है, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। “कंपनी अपने उत्पाद का एक हिस्सा ऐसे परिवारों तक पहुंचाने का काम करती है, ताकि बच्चों को बुनियादी पोषण मिल सके। यह सहयोग हमारे काम को और मजबूती देता है,” उन्होंने जोड़ा

स्थानीय सहयोग से सफल आयोजन

कार्यक्रम के आयोजन में अवकाश प्राप्त पंचायत सचिव रामचंद्र पासवान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सहयोग और मार्गदर्शन से परोरिया गांव में वितरण कार्य सुचारु रूप से संपन्न हुआ। रामचंद्र पासवान ने जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव लाने का काम कर रही है।

“मैं काफी दिनों से जवाहर ज्योति से आग्रह कर रहा था कि उजियारपुर क्षेत्र में भी संस्था का सहयोग मिलना चाहिए। आज यह अवसर मिला है, इसके लिए मैं संस्था का आभारी हूं,” रामचंद्र पासवान ने कहा। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर बल दिया। “शिक्षा ही विकास का रास्ता दिखाती है। आप सभी अपने बच्चों को पढ़ाइए, उन्हें स्कूल भेजिए। बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों से बच्चों को बचाइए। जब हमारे बच्चे पढ़ेंगे-लिखेंगे, तभी जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र का सपना साकार हो सकेगा,” उन्होंने कहा।

रामचंद्र पासवान के शब्दों में एक अनुभवी समाजसेवी की चिंता और उम्मीद दोनों झलक रही थीं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ होते हैं, या फिर उन्हें छोटी उम्र में ही काम पर लगा देते हैं। ऐसे में जवाहर ज्योति जैसी संस्थाओं का हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो जाता है।

बाल अधिकारों पर केंद्रित संदेश

कार्यक्रम में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान जितेंद्र कुमार पासवान भी मौजूद थे। उन्होंने जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था बाल अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए समर्पित है।”बाल अधिकार केवल कागजों पर लिखी बातें नहीं हैं। ये तभी मिल सकते हैं जब बच्चे पढ़ेंगे-लिखेंगे, स्वस्थ रहेंगे और सुरक्षित माहौल में बड़े होंगे,” जितेंद्र कुमार पासवान ने कहा। उन्होंने माता-पिता से सीधे संवाद करते हुए आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें अच्छे संस्कार दें। “एक शिक्षित बच्चा न केवल अपने परिवार का भविष्य बदलता है, बल्कि पूरे समाज और देश के विकास में योगदान देता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे,” उन्होंने जोड़ा।जितेंद्र कुमार पासवान ने यह भी कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याएं आज भी ग्रामीण भारत में चुनौती बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए सामुदायिक जागरूकता और संस्थागत सहयोग दोनों की आवश्यकता है। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहा है, और स्थानीय लोगों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

ग्रामीणों में उत्साह, सैकड़ों लोग हुए शामिल

वितरण कार्यक्रम में परोरिया गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे थे। मौके पर शंभू पासवान, उत्तम पासवान, लखिंदर पासवान, राजा कुमार, राहुल रौशन, कामिनी कुमारी, महिंद्र पासवान, सुबोध कुमार साह, नीधि कुमारी, राधा कुमारी समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने न केवल सामग्री प्राप्त की बल्कि संस्था के प्रतिनिधियों से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी ली।कई लाभुकों ने बताया कि ग्लूकोज जैसी बुनियादी पोषण सामग्री उनके लिए बड़ी राहत है, खासकर गर्मी के मौसम में जब बच्चों को ऊर्जा की अधिक आवश्यकता होती है।

एक महिला लाभुक ने कहा, “हमारे पास इतने संसाधन नहीं होते कि बच्चों के लिए अलग से पौष्टिक चीजें खरीद सकें। ऐसे में संस्था का यह सहयोग बहुत मायने रखता है।”कार्यक्रम के दौरान बच्चों की भी अच्छी-खासी उपस्थिति देखी गई। संस्था के कार्यकर्ताओं ने बच्चों से बातचीत की, उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में बताया और उनसे स्कूल नियमित जाने का वादा लिया। कुछ बच्चों ने उत्साहपूर्वक बताया कि वे स्कूल जाते हैं और आगे पढ़कर डॉक्टर या शिक्षक बनना चाहते हैं।

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र: एक परिचय

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र (jjbvk), अख्तियारपुर स्थित एक गैर-सरकारी सामाजिक संस्था है, जो बच्चों के समग्र विकास के लिए काम करती है। संस्था का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण पर है। यह संस्था समस्तीपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों में सक्रिय है और समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर, शैक्षणिक सामग्री वितरण और पोषण सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित करती है।संस्था का मानना है कि बच्चों का बचपन सुरक्षित और खुशहाल होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, उचित पोषण मिले और वे शोषण तथा कुरीतियों से सुरक्षित रहें। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करता है और सरकारी योजनाओं तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के बीच सेतु का काम करता है।डाबर इंडिया जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी संस्था को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है। कंपनी न केवल उत्पाद के रूप में सहयोग करती है बल्कि संस्था के विजन को भी समझती है और उसका समर्थन करती है।

शिक्षा और जागरूकता: बदलाव की कुंजी

कार्यक्रम में बार-बार शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की सबसे बड़ी बाधा अशिक्षा है। जब माता-पिता शिक्षित नहीं होते, तो वे बच्चों की शिक्षा के महत्व को नहीं समझ पाते और उन्हें जल्दी काम पर लगा देते हैं या कम उम्र में शादी कर देते हैं।जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र इस मानसिकता को बदलने के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्था न केवल बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि अभिभावकों को भी जागरूक करती है कि शिक्षा में निवेश भविष्य में कई गुना लाभ देता है। संस्था के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर परिवारों से मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं।बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ संस्था का अभियान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बिहार के कई हिस्सों में आज भी कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसी तरह, गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने लगते हैं। जवाहर ज्योति इन मुद्दों पर समुदाय को संवेदनशील बनाने का काम कर रही है।

स्थानीय नेताओं और समाजसेवियों का समर्थन

कार्यक्रम में स्थानीय स्तर के कई समाजसेवियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की उपस्थिति ने इसे और अधिक प्रभावी बनाया। रामचंद्र पासवान और जितेंद्र कुमार पासवान जैसे लोगों का समर्थन संस्था के काम को वैधता और विश्वसनीयता प्रदान करता है। जब स्थानीय नेता किसी पहल का समर्थन करते हैं, तो समुदाय उस पर अधिक भरोसा करता है और उसमें भाग लेता है।रामचंद्र पासवान ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पंचायत सचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास की चुनौतियों को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब स्थानीय संस्थाएं और समुदाय मिलकर काम करें। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र इसी सहयोग का एक उदाहरण है।जितेंद्र कुमार पासवान ने अपने आरपीएफ के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने देखा है कि कैसे शिक्षा की कमी बच्चों को गलत रास्ते पर ले जा सकती है। “जब बच्चे पढ़ते हैं, तो वे अपने अधिकारों को समझते हैं और अपने लिए बेहतर भविष्य चुन सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को यह अवसर मिले,” उन्होंने कहा।

भविष्य की योजनाएं

बलराम चौरसिया ने बताया कि जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की योजना उजियारपुर प्रखंड के अन्य गांवों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की है। संस्था का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा जाए और उन्हें शिक्षा तथा पोषण संबंधी सहायता दी जाए।उन्होंने यह भी बताया कि संस्था जल्द ही बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री वितरण और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, किशोरियों के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा पर चर्चा होगी।संस्था का दीर्घकालिक विजन एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहां हर बच्चा, चाहे वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, शिक्षा प्राप्त कर सके, सुरक्षित महसूस कर सके और अपने सपनों को पूरा कर सके। इसके लिए संस्था सरकारी विभागों, कॉर्पोरेट भागीदारों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है मुझे न्यूज़ - ऑटोमोबाइल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, मनोरंजन, एजुकेशन और खेल सहित विभिन्न श्रेणियों में लिखना पसंद है

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