दलसिंहसराय, 20 मार्च 2026। समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय प्रखंड क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर द्वारा एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार पांड़ पंचायत एवं मोख्तियारपुर सलखन्नी पंचायत में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।इस कार्यक्रम का आयोजन जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर के बैनर तले प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता शिव किशोर सिंह के नेतृत्व में किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा बच्चों के शिक्षा और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करना था।सेमिनार को संबोधित करते हुए संस्था के कार्यकारिणी सदस्य रामप्रित चौरसिया ने बच्चों के अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र अपनी स्थापना के समय से ही बाल अधिकारों की रक्षा और उनके समुचित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बाल विवाह और बाल श्रम को समाज की गंभीर बुराइयां बताते हुए कहा कि ये दोनों कुरीतियां बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना देती हैं। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।रामप्रित चौरसिया ने आगे कहा कि बाल विवाह के कारण बच्चों का जीवन समय से पहले जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाता है, जिससे उनका बचपन समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार बाल श्रम बच्चों को शिक्षा से दूर कर उन्हें शोषण की ओर धकेलता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक खुशहाल और विकसित समाज का निर्माण तभी संभव है जब बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और स्वस्थ वातावरण मिले। “खुशहाल बचपन से ही खुशहाल समाज की नींव रखी जा सकती है,” उन्होंने कहा।कार्यक्रम में बलराम चौरसिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस दिशा में जागरूक होना होगा और अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित वैवाहिक आयु का उल्लेख करते हुए कहा कि लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद और लड़कों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विवाह से पहले बच्चों को शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकें।सेमिनार में हर्ष मोहन कुमार ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करती है। शिक्षा के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें और उन्हें स्कूल भेजना सुनिश्चित करें।सामाजिक कार्यकर्ता राजीव कुमार पासवान ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र एक समर्पित सामाजिक संस्था है, जो निस्वार्थ भाव से समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करती है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को खुशहाल बचपन प्रदान करना है।सेमिनार के उपरांत सामाजिक सेवा के तहत जरूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया गया।

पांड़ पंचायत में गरीब परिवारों के बीच एक-एक किलो ग्लूकोज एवं एक-एक डिब्बा वितरित किया गया। वहीं मोख्तियारपुर सलखन्नी पंचायत में भी असहाय, विधवा एवं विकलांग व्यक्तियों के बीच इसी प्रकार की सामग्री का वितरण किया गया। इस पहल को ग्रामीणों ने सराहा और संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में पांड़ पंचायत के मुखिया प्रमोद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा बनारसी पासवान, दिनेश पासवान, राम स्वार्थ पासवान, समाजसेवी चंद्रकांत सिंह, सुरेश महतो सहित अनेक स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल हुए और अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन शिव किशोर सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों, वक्ताओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है और बच्चों को एक सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य प्रदान किया जा सकता है।इस सेमिनार ने न केवल ग्रामीणों को जागरूक किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी दिया। कार्यक्रम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज के लोग एकजुट होकर प्रयास करें, तो किसी भी सामाजिक समस्या का समाधान संभव है।
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