बेतिया, पश्चिम चंपारण | 16 जून 2026
किशोरावस्था में सही मार्गदर्शन से ही सशक्त समाज बनता है। इसी उद्देश्य से सोमवार को पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड अंतर्गत पिपरा नौरंगिया पंचायत में “किशोर-किशोरी सशक्तिकरण” विषय पर पंचायत स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंचायत के जनप्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं, विकासमित्रों और जीविका दीदियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम का आयोजन बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था “प्रथम” के सहयोग से किया गया। इसका मुख्य मकसद पंचायत स्तर पर किशोर-किशोरियों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना था।
बच्चों की परिभाषा से शुरू हुई चर्चा
उन्मुखीकरण सत्र की शुरुआत प्रथम संस्था के प्रखंड समन्वयक शुभम कुमार ने की। उन्होंने सबसे पहले बच्चों और किशोर-किशोरियों की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि 18 साल से कम उम्र का हर व्यक्ति बच्चा है और किशोरावस्था 10 से 19 साल की उम्र को कहते हैं। इसी उम्र में सही शिक्षा और सुरक्षा देना सबसे जरूरी है।

शुभम कुमार ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और कर्मियों को बताया कि किशोर-किशोरी सिर्फ स्कूल की जिम्मेदारी नहीं हैं। पंचायत, परिवार और समुदाय सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे इस उम्र में होने वाली हिंसा, शोषण और भेदभाव से उनकी रक्षा करें।
बाल अधिकार और सरकारी योजनाओं पर फोकस
बैठक में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई:
- बाल अधिकार: बच्चों को शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार और खेलने का अधिकार मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे को काम पर लगाना या पढ़ाई से वंचित करना बाल अधिकारों का हन है।
- सामाजिक सुरक्षा योजना: किशोर-किशोरियों के लिए चल रही सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। मुखिया और विकासमित्रों से कहा गया कि पात्र बच्चों को इन योजनाओं से जोड़ा जाए।
- बाल श्रम और बाल विवाह पर रोक: बताया गया कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे से कोई भी काम कराना बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसी तरह 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी बाल विवाह है। इसे रोकने के लिए पंचायत स्तर पर निगरानी जरूरी है।
- हिंसा और शोषण से सुरक्षा: किशोर-किशोरियों को शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा से बचाने के उपाय बताए गए। बच्चों को “गुड टच-बैड टच” के बारे में सिखाने और CWPC यानी Child Welfare & Protection Committee को पंचायत स्तर पर सक्रिय करने पर जोर दिया गया।
- कौशल प्रशिक्षण और भागीदारी: किशोरावस्था में ही कौशल विकास शुरू करने की सलाह दी गई। साथ ही पंचायत की बैठकों में किशोर-किशोरियों को बुलाकर उनकी बात सुनने और उन्हें निर्णय में भागीदारी देने की अपील की गई। इससे उनका आत्मसम्मान और आत्ममूल्यांकन बढ़ेगा।
इसे भी पढ़ें: योगापट्टी बगही पुरैना पंचायत में जनप्रतिनिधियों को बताए गए किशोर-किशोरी सशक्तिकरण के दायित्व
हेल्पलाइन नंबर की दी गई जानकारी
सत्र के अंत में शुभम कुमार ने सभी को जरूरी हेल्पलाइन नंबर याद रखने को कहा। उन्होंने बताया कि अगर कहीं भी कोई बच्चा मुसीबत में है, बाल श्रम कर रहा है या बाल विवाह होने वाला है तो तुरंत चाइल्डलाइन 1098 पर कॉल करें। यह नंबर 24×7 फ्री है। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन 181 और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर भी सूचना दी जा सकती है।
मुखिया और जीविका दीदियों की भागीदारी
इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में पंचायत मुखिया, काजल कुमारी, विकासमित्र, आंगनवाड़ी सेविकाएं और जीविका कम्युनिटी मोबलाइजर शामिल रहीं। मुखिया काजल कुमारी ने कहा कि अब पंचायत स्तर पर किशोर-किशोरी समूह बनाए जाएंगे और हर महीने उनकी बैठक होगी। जीविका दीदियों ने भी गांव-गांव जाकर माताओं को जागरूक करने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
पिपरा नौरंगिया पंचायत में हुआ यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम एक शुरुआत है। जब जनप्रतिनिधि और फ्रंटलाइन वर्कर किशोर-किशोरी के मुद्दों को समझेंगे, तभी गांव का हर बच्चा सुरक्षित रहेगा और सशक्त बनेगा। प्रथम संस्था का मानना है कि बच्चों को अवसर देना ही असली विकास है।