बेतिया, पश्चिम चंपारण,17 जून 2026: योगापट्टी प्रखंड के बगही पुरैना पंचायत भवन में बुधवार को किशोर – किशोरी सशक्तिकरण पर एक दिवसीय पंचायत स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रथम संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उदेश्य पंचायत के जनप्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के कर्मियों को बच्चों एवं किशोरों के मुद्दों पर संवेदनशील बनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय मुखिया जी ने किया। इस मौके पर प्रथम संस्था के प्रखंड समन्वयक सुभम कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों पर विस्तृत जानकारी को साझा किया।
कार्यक्रम के मुख्य उदेश्य
कार्यक्रम के दौरान प्रथम संस्था के प्रखंड समन्वयक सुभम कुमार ने सबसे पहले वहां उपस्थित सभी लोगो के सामने “बच्चा” और “किशोर-किशोरी” की परिभाषा को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के सभी व्यक्ति बच्चे की श्रेणी में आते हैं जबकि 10 से 19 वर्ष की आयु वर्ग को किशोरावस्था माना जाता है। ये वह उम्र होती है जब शारीरिक और मानसिक बदलाव तेज़ी से होते हैं और सही मार्गदर्शन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
चर्चा के दौरान बाल अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि संविधान और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिपोशाक कारों समझौते के तहत हर बच्चे को जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार और भागीदारी का अधिकार प्राप्त है। पंचायत स्तर पर इन अधिकारों को सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है ।
सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाएं
उन्मुखीकरण में बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना,मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना, और मुख्यमंत्री साइकिल योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया। शुभम कुमार ने कहा कि अक्सर जानकारी के अभाव में जरूरतमंद बच्चे इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। पंचायत प्रतिनिधियों और आंगनवाड़ी सेविकाओं की भूमिका यहां महत्वपूर्ण हो जाती है।
बाल विवाह, बाल श्रम और हिंसा पर रोक
कार्यक्रम में बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है बल्कि यह लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों को बुरी तरह से प्रभाबित करता है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के की शादी गैरकानूनी है।
इस कानून और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को विस्तार से समझने के लिए आप हमारा पिछला लेख पढ़ सकते है: अक्षय तृतीय पर पश्चिम चम्पारण में बाल विवाह के खिलाफ महाअभियान, धर्मगुरुओं ने गीतों से दिया संदेश
इसी तरह बाल श्रम को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी तरह के काम करवाना दंडनीय अपराध है। पंचायत स्तर पर यदि कहीं भी बाल श्रम के मामले दिखें तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सुचना देने की अपील की गई। सुचना देने वाले की नाम गुप्त रखी जाएगी।
CWPC को सक्रिय करने पर बल
बच्चों की सुरक्षा के लिए पंचायत स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति यानि CWPC को सक्रिय करने पर विशेष चर्चा की गई। प्रथम संस्था की काजल कुमारी ने बताया कि कई पंचायतों में CWPC केवल कागजों पर है । CWPC को हर महीने बैठक करनी चाहिए और गांव में बच्चों से जुड़े मामलों पर नज़र रखनी चाहिए। स्कूल से ड्रॉपआउट बच्चे, कुपोषित बच्चे, या हिंसा के शिकार बच्चों की पहचान कर उनकी मदद कर सकती है।
कौशल विकास और भागीदारी
किशोर-किशोरीयों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण पर भी बात की गई। सुभम कुमार ने बताया की 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सिलाई, कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाना चाहिए। इससे वे आगे चलकर रोजगार पा सकेंगे या स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे।
इसके साथ ही पंचायत की बैठकों और ग्राम सभा में किशोर-किशोरियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उनका कहना था कि जब तक हम बच्चों की बात नही सुनेंगे तब तक उनके लिए सही योजना नहीं बना पाएंगे। बाल संसद और मीना मंच जैसे प्लेटफ़ॉर्म को हर स्कूल में मजबूत करना होगा।
कौन – कौन रहे उपस्थित
इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रथम संस्था से काजल कुमारी के अलावा स्थानीय मुखिया, वार्ड सदस्य, विकास मित्र, सभी आंगनवाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, जिविका कम्युनिटी मोबिलाइज़र, और बिद्यालय के शिक्षक शामिल हुए। कुल मिलाकर 40 से अधिक लोगों ने भाग लिया और बच्चों के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
विकास मित्र ने बताया की इस तरह के कार्यक्रम से जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को नई जानकारी मिलती है। हम लोग अक्सर योजनाओं के बारे में पूरी तरह नहीं जान पाते। आज बहुत सी शंकाएं दूर हुई।

आंगनवाड़ी सेविका ने बताया कि उनके केंद्र पर कई किशोरियां आती हैं। अब वे उन्हें पोषण के साथ साथ अधिकारों और सुरक्षा के बारे में भी बता पाएंगी।