बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार | जिला श्रम अधीक्षक के आदेश पर आज 28 अप्रैल 2026 को बाल श्रम उन्मूलन को लेकर विशेष धावादल अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत तीन प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारीयों, प्रथम संस्था के प्रतिनिधियों तथा पुलिस बल की संयुक्त टीम का गठन किया गया।

टीम ने बगहा – 2 एवं शहर क्षेत्र में सघन जांच अभियान संचालित किया। जांच के दौरान बगहा – 2 क्षेत्र से एक नाबालिक बच्चे को श्रम करते हुए पाया गया। धावादल ने तत्काल कारवाई करते हुए बच्चे को नियोजक के चंगुल से मुक्त कराया।
CWC के आदेश पर चाइल्ड होम में सुपुर्द
बालक की मुक्ति के बाद सभी आवश्यक क़ानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। बाल कल्याण समिति, CWC के समक्ष बच्चे को प्रस्तुत किया गया। CWC के आदेश के बाद बच्चे को तत्काल चाइल्ड होम में देखरेख एवं पुनर्वास के लिए सुपुर्द कर दिया गया। चाइल्ड होम में बच्चे की काउंसलिंग, स्वास्थ्य जांच और शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
अधिकारीयों का बयान
इस संबंध में धावादल में शामिल एक श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने बताया कि जिला श्रम अधीक्षक के निर्देश पर यह नियमित अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जिले को बाल श्रम मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम कराना बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी नियोजक के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।प्रथम संस्था के प्रतिनिधि ने बताया कि मुक्त कराए गए बच्चे के परिवार से संपर्क कर सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है तो उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चा दोबारा श्रम के लिए मजबूर न हो।
आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। आने वाले दिनों में भी होटल, ढाबा, दुकान, गैरेज और ईंट भट्ठों पर औचक छापेमारी जारी रहेगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें कहीं बाल श्रम की सूचना मिले तो वे तत्काल जिला टास्क फोर्स, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या नजदीकी थाना को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।जिला श्रम विभाग द्वारा स्कूलों और पंचायतों में बाल श्रम के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर बच्चे के हाथ में किताब हो, औजार नहीं।