बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 30 अप्रैल 2026 को बेतिया में श्रम संसाधन विभाग द्वारा एक विशेष अभियान चलाया गया। “बाल श्रम उन्मूलन दिवस” के अवसर पर “बाल श्रम मुक्त जिला” बनाने के संकल्प के साथ एक जागरूकता रथ (प्रचार गाड़ी) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को बाल श्रम के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना और समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रम परिवर्तन पदाधिकारी और उपस्थित संस्थाओं के सदस्यों द्वारा किया गया। सभी अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम न केवल बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाता है, बल्कि समाज के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है। इसलिए इसे जड़ से समाप्त करना बेहद आवश्यक है।

जागरूकता रथ बेतिया शहर के विभिन्न इलाकों, बाजारों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर पहुंचा। इस दौरान अभियान से जुड़े सदस्यों ने दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों से संवाद किया। टीम ने लोगों को समझाया कि बच्चों से मजदूरी कराना कानूनन अपराध है और इससे उनके शारीरिक व मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही, यह भी बताया गया कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
अभियान के दौरान एक विशेष पहल के तहत दुकानों और प्रतिष्ठानों पर जाकर लोगों से शपथ पत्र भरवाया गया। इस शपथ पत्र में लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे न तो बाल श्रम करेंगे और न ही किसी अन्य को ऐसा करने देंगे। इस पहल को स्थानीय लोगों का अच्छा समर्थन मिला और कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से इस अभियान में भाग लिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है और लोग इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
इस कार्यक्रम में श्रम संसाधन विभाग की ओर से लोकेश झा, कामेश्वर सिंह और प्रदीप कुमार की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं, प्रथम संस्था के प्रतिनिधियों में अमरपाल सिंह राठौड़, राजीव रंजन, शुभम कुमार, सोनू कुमार, पूजा कुमारी और काजल कुमारी ने भी अहम भूमिका निभाई। इन सभी ने मिलकर जागरूकता अभियान को सफल बनाने के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के जन-जागरूकता अभियान बाल श्रम जैसी समस्या को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। जब तक समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
बाल श्रम उन्मूलन दिवस जैसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि हर बच्चे को सुरक्षित और खुशहाल बचपन का अधिकार है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित कर बच्चों से काम करवाना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। ऐसे में सरकार, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर इस दिशा में निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है।
इस जागरूकता रथ अभियान के माध्यम से बेतिया में एक सकारात्मक संदेश दिया गया है कि बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि समाज का हर नागरिक इस जिम्मेदारी को समझे और अपने स्तर पर प्रयास करे, तो वह दिन दूर नहीं जब “बाल श्रम मुक्त जिला” का सपना साकार होगा।