समस्तीपुर: विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में शुरू हुए ‘नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ के तहत जिले में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र– JJBVK ने बच्चों की ट्रैफिकिंग रोकने के लिए निर्णायक जंग का एलान किया है।संगठन ने कहा कि सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों के सहयोग से समस्तीपुर जिले से बाल दुर्व्यापार पर पूरी तरह रोकथाम किया जाएगा।
क्या है अभियान का उद्देश्य
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान के तहत जिले भर में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रैफिकरों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
संगठन का फोकस हाशिये पर रहे कमजोर परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी रहेगा। ताकि आर्थिक तंगी के कारण बच्चे ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल में न फंसे और उनकी पढ़ाई जारी रह सके। ट्रैफिकिंग से मुक्त कराए गए बच्चों के उचित पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापसी को भी अभियान की प्राथमिकता बताया गया।
नई दिल्ली में लिया गया राष्ट्रीय फैसला
बच्चों की ट्रैफिकिंग के खिलाफ यह राष्ट्रव्यापी अभियान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन– JRC नेटवर्क द्वारा शुरू किया गया है। JJBVK इस नेटवर्क का सहयोगी संगठन है। नई दिल्ली के कांस्टीटयुशन क्लब में JRC के 4 दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श “Ensuring A Child Rights,Potential And Prosperity” में देश के 782 जिलों से आए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों ने मिलकर यह निर्णय लिया। यह कैंपेन 2030 तक चलाया जाएगा।
उद्धाटन सत्र को को संबोधित करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा, “किसी भी बच्चे की जिंदगी बचाना सबसे नेक काम है। छोटी उम्र की बच्चियां ट्रैफिकिंग की शिकार हो जाती हैं और फिर कभी घर नहीं लौट पातीं। इन्हें यौन शोषण के दलदल से मुक्त कराने वाले नागरिक समाज के स्वयंसेवी किसी फरिश्ते से कम नहीं होते।”
आंकड़े डराने वाले
JJBVK के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ो का हवाला देते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में रोजाना 6 बच्चों की ट्रैफिकिंग होती है और 5 बच्चों को जबरन मजदूरी कराई जाती है। सरकारी आंकड़ो के अनुसार हर घंटे 11 बच्चे गुम हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश ट्रैफिकिंग के शिकार होते हैं।
उन्होनें कहा, “ह्यूमन ट्रैफिकिंग हथियारों और ड्रग्स के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। ट्रैफिकर बाहर से नहीं आते, वे आस-पास के ही लोग होते हैं जो नौकरी और बेहतर जीवन का लालच देकर बच्चों को ले जाते हैं और फिर उन्हें वेश्यावृत्ति, भिक्षावृत्ति और बंधुआ मजदुरी में धकेल देते हैं।”
JRC के प्रयासों से अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देशभर में 1,22,516 बच्चों को ट्रैफिकिंग से बचाया जा चुका है।